इस समय डीएपी की किल्लत के बीच निजी दुकानदार किसानों की मजबूरी देख 1800 रुपये प्रतिबोरी बेंच रहे हैं। विभाग के अफसर आंख मूंदे बैठे हैं। परेशान किसान खाद के लिए चक्कर काट रहे हैं। शनिवार को गोरखापुर समिति पर किसानों की धक्का मुक्की के बीच प्रभारी के साथ गलत वितरण करने पर नोकझोंक भी हुई। गेंहू, आलू संग दलहन और तिलहन आदि फसलों की बोआई के चलते डीएपी की मांग बढ़ गई है। किसानों ने खेत में नमी पाकर गेहूं की भी बोआई तेज कर दिए हैं। अलाम यह है कि बड़े इफको केंद्र गौरीगंज, मुसाफिरखाना सहित अन्य समितियों पर डीएपी नहीं है। सग्रामपुर कृषक केंद्र पर ताला लटक रहा है। गौरीगंज के माधोपुर, अमेठी खेरौना, ताला, महराजपुर, गैरिकपुर सहित 30 से अधिक समितियों पर खाद ही नहीं है। ऐसे में समितियों व इफको केंद्रों पर डीएपी नहीं होने से किसानों को बोआई प्रभावित हो रही है। संग्रामपुर के गोरखापुर साधन समिति पर शनिवार को खाद वितरित की जा रही थी। इस दौरान किसानों की लंबी कतार लग गई। पहले खाद लेने के लिए किसान आपस में धक्का मुक्की करने लगे। कतार में लगे किसानों ने सचिव पर आरोप लगाया कि किसी को 10 बोरी खाद दी जा रही है तो किसी किसान को मात्र एक बोरी। किसान विरोध किया तो सचिव के बीच जमकर नोकझोंके हुई। किसानों ने बताया कि सुबह छह बजे से लाइन में लगे थे, जो सचिव का परिचित था उसको टोकन मिला। कई किसान मायूस होकर लौट गए।

